भास्कर संवाददाता | नागौर /खींवसरबच्चों के भामाशाह के नाम से प्रसिद्ध 86 वर्षीय बंशीलाल राठी ने हर साल की तरह शुक्रवार को खींवसर के लालावास मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव पर सरकारी और निजी स्कूलों के 9 हजार बच्चों को शिक्षण-सामग्री का वितरण किया। खींवसर निवासी हाल चैन्नई में रहकर कारोबार करने वाले भामाशाह राठी 18 साल से कमाई का 25 प्रतिशत हिस्सा गरीब बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं। राठी राजस्थान ही नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों के सरकारी व निजी कॉलेजों में भी जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करते हैं। लालावास स्थित हनुमानजी के मंदिर में सरकारी व निजी स्कूलों के 9 हजार बच्चों को बैग, किताबें सहित शिक्षण-सामग्री वितरित की। भामाशाह बंशीलाल राठी को पदम श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस दौरान खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल, भाजपा नेता धनंजय सिंह सहित राठी परिवार से नवलकिशोर राठी, अशोक कुमार, नरेंद्र कुमार मौजूद थे।हनुमानजी को लगाया गया 56 भोग।एक दिन मेंजवान तैनातसहित कुलकक्षा 1 सेस्कूली बच्चों को वितरित की शिक्षण-सामग्री।भक्त मंडलीतक के निजी व सरकारी स्कूलों के बच्चों को बांटी सामग्रीलालावास मंदिर में बच्चों को शिक्षण सामग्री वितरित करते हुए।हनुमान जन्मोत्सव पर हर साल खींवसर के लालावास मंदिर में भामाशाह राठी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कक्षा एक से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ाई से लेकर खेल सामग्री से जुड़ा किट उपलब्ध करवाया जाता है। शुक्रवार को 9 हजार बच्चों को बांटे गए किट में एक बड़ा स्कूली बैग जिसमें पानी व जूस बोतल, टिफिन, नोट बुक, बॉल, पेन-पेंसिल, चॉकलेट सहित अन्य उपकरण शामिल थे।राठी ने ही बनाया सालासर की तर्ज पर लालावास में हनुमान मंदिरभामाशाह राठी ने करीब 30 वर्ष पहले लालावास में सालासर की तर्ज पर हनुमान मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर की पहचान इसलिए अलग है, उसमें चांदी जड़ित है। यहां गार्डन, हजारों श्रद्धालुओं के रुकने के लिए भवन का भी निर्माण करवाया।भामाशाह राठी ने 18 साल पहले हनुमान जन्मोत्सव पर लालावास मंदिर से 11 सौ बच्चों को निशुल्क शिक्षण सामग्री वितरण से इस मुहिम को शुरू किया था। वर्तमान में 9 हजार तक पहुंच चुकी है। जिसके लिए वो हर साल लाखों रुपए खर्च करते हैं।भामाशाह राठी को छोटी उम्र में ट्रेन में सफर के दौरान एक बच्चे से ही उन्हें ऐसी प्रेरणा मिली। राठी बताते है कि ट्रेन यात्रा के दौरान उनकी नजर एक बच्चे पर पड़ी जो सामान बेच रहा था। उसके बैग में कुछ किताबें थी। उसी दिन संकल्प लिया कि जरूरतमंदों की पढ़ाई पर कमाई का 25% हिस्सा खर्च करेंगे।1100 बच्चों से शुरू की मुहिम अब 9 हजार तक पहुंचीट्रेन में बच्चे को सामान बेचते देखा तो सहयोग का लिया था संकल्प
Source: Dainik Bhaskar April 20, 2019 03:45 UTC